O LEVEL | M1-R5 | PROTOCOL & IT'S TYPES BY. SUNRISE COMPUTER
PROTOCOLS
PROTOCOL | INTRODUCTION
Protocol नियमों का एक समूह होता है जिसका प्रयोग एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में डेटा को ट्रान्सफर करने के लिए किया जाता है। “प्रोटोकॉल नियमों (rules) का एक समूह (set) होता है जिसका उपयोग data को send और receive करने के लिए किया जाता है।” प्रोटोकॉल शब्द का मतलब है “नियमों का समूह”। कंप्यूटर नेटवर्क में data के आदान-प्रदान के लिए भी कुछ नियम बनाये गये हैं जिसे ही प्रोटोकॉल कहा जाता है। कंप्यूटर नेटवर्क में, प्रोटोकॉल का प्रयोग डिवाइसों और कंप्यूटरों के बीच डेटा को format करने, transmit करने और receive करने के लिए किया जाता है।”बिना protocol के हम इंटरनेट का प्रयोग नहीं कर सकते है।
उदाहरण :- HTTP एक हाइपर टेक्स्ट ट्रान्सफर प्रोटोकॉल है जिसका प्रयोग इन्टरनेट में files को ट्रान्सफर करने के लिए किया जाता है।
PROTOCOL | TYPES
- NETWORK PROTOCOL
- CONNECTIVTIY PROTOCOL
- MAIL PROTOCOL
CONNECTIVITY PROTOCOL | SMTP
SMTP का पूरा नाम Simple Mail Transfer Protocol होता है। जिसका प्रयोग मेल को भेजने व रिसीव करने के लिए किया जाता है। मेल भेजने व प्राप्त करने के लिए सबसे मुख्य प्रोटोकॉल होता है।
जब कोई मेल भेजा जाता है, तो वह मेल डायरेक्टली क्लाइंट कंप्यूटर से मेल सर्वर पर जाता है। जब तक मेल सर्वर पर सुरक्षित नही हो जाती है, तब तक SMTP मुख्य रूप से सक्रिय रहता है।
ये TCP/IP par आधारित एक एप्लीकेशन लेयर प्रोटोकॉल है, जो कि पोर्ट नंबर 25 पर कार्य करता है, इसे Push Protocol के नाम से भी जाना जाता है।
CONNECTIVITY PROTOCOL | TCP
TCP का पूरा नाम Transmission Control Protocol होता है। जिसका प्रयोग डाटा ट्रांसमिशन के लिए किया जाता है। ये एक कनेक्शन ओरिएंटेड प्रोटोकॉल है, जो डाटा को ट्रांसमिट करने से पहले सेंटर और रिसीवर के मध्य कनेक्शन established करवाता है।
ये प्रोटोकॉल के पास Self Detection Facility होती है, जिससे ये यह सुनिश्चित करता है कि डाटा जिस फॉर्म में भेजा गया है उस फॉर्म में गया है कि नहीं।
डाटा को छोटे छोटे पैकेट्स में विभाजित करके उन्हे नंबर देने का काम TCP का ही होता है। ये एक कनेक्शन ओरिएंटेड प्रोटोकॉल है, क्योंकि ये तब तक कनेक्शन रखता है जब तक सभी डाटा पैकेट्स अपने निर्धारित डेस्टिनेशन में नही पहुंच जाते है।
TCP | FEATURES OF TCP
- TCP एक विश्वसनीय प्रोटोकॉल है।
- TCP एक कनेक्शन ओरिएंटेड प्रोटोकॉल है।
- TCP के पास error checking और रिकवरी मैकेनिज्म फंक्शनैलिटी होती है।
- TCP end to end communication backbone प्रदान करता है।
- TCP दोनो मॉडल क्लाइंट सर्वर और प्वाइंट तो प्वाइंट पर कार्य करता है।
- TCP एक फुल डुप्लेक्स सर्वर प्रदान करता है, जो कि सेंडर और रिसीवर दोनो की भूमिका निभा सकता है।
CONNECTIVITY PROTOCOL | IMAP PROTOCOL
IMAP का पूरा नाम Internet Messege Access Protocol होता है। जिसका प्रयोग क्लाइंट को अपने लोकल कंप्यूटर में रिमोट सर्वर से ईमेल एक्सेस करने की सुविधा देता है। IMAP प्रोटोकॉल में ईमेल की कॉपी यूजर के लोकल कंप्यूटर तथा मेल सर्वर दोनो में मौजूद रहती है, जिससे अलग अलग यूजर अलग अलग डिवाइस में ईमेल को login कर ईमेल को पढ़ सकते है।
IMAP default रूप से पोर्ट 143 को follow करता है तथा यूजर के आवश्यकता अनुसार इस नंबर को बदला भी जा सकता है।
IMAP द्वारा प्रयोग किए जाने वाले दो पोर्ट है:-
Port 143 : Non Encrypted IMAP Port
यह पोर्ट नंबर एक कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल है, जो कि insecure होता है। ये IMAP का डिफॉल्ट पोर्ट नंबर है। ये TCP/IP Model में कम्युनिकेट करने के लिए काम आता है।
Port 993 : SSL / TSL Port
SSL का पूरा नाम Secure Socket Layer होता है। जिसका प्रयोग नेटवर्क में किन्ही दो कंप्यूटर के मध्य सिक्योरिटी के साथ कम्युनिकेशन स्थापित करने के लिए किया जाता है।
#TSL का पूरा नाम ट्रांसपोर्ट सिक्योरिटी लेयर होता है। ये SSL का अपडेट वर्जन है। TSL, SSL की तुलना में अधिक सिक्योरिटी प्रदान करता है।
IMAP PROTOCOL | HISTORY OF IMAP
- IMAP1 को सन् 1986 में Mark Crispin द्वारा डिजाइन किया गया था।
- IMAP2 को सन् 1988 में RFC 1064 (Request for Comments) के साथ विकसित किया गया था।
- IMAP3 को सन् 1991 में RFC 1203 के साथ विकसित किया गया था।
- IMAP4 को सन् 1994 में RFC 1730 और RFC 1731 के साथ विकसित किया गया था। ये IMAP का लेटेस्ट वर्जन है।
IMAP PROTOCOL | FEATURE OF IMAP
- Client को रिमोट सर्वर से ईमेल को एक्सेस करने की सुविधा देता है।
- IMAP Protocol messege flag set करता है, जिससे यूजर देख सकता है कि उसने कौन सा ईमेल पहले देखा।
- ये ईमेल के केवल एक ही हिस्से को डाउनलोड करता है, अधिकतर हेडर को डाउनलोड करता है।
- IMAP में ईमेल को एक्सेस करने के बाद भी एक कॉपी सर्वर पर सेव हो जाती है।
- IMAP में यूजर मेल को अलग अलग डिवाइस से एक्सेस कर सकता है।
- IMAP Connection established करने के लिए पोर्ट 143 और पोर्ट 993 का प्रयोग करता है।
IMAP PROTOCOL | ADVANTAGE OF IMAP
- IMAP प्रोटोकॉल यूजर को मेल सर्वर पर सभी फोल्डर को देखने की अनुमति देता है।
- IMAP प्रोटोकॉल में यूजर ईमेल को अनेक डिवाइस में एक्सेस कर सकता है।
- प्राप्त किये गए ईमेल को डाउनलोड करने से पहले आंशिक रूप से पढ़ा जा सकता है।
- यह यूजर को ईमेल को Sync करने की अनुमति देता है।
- उपयोगकर्ता अपने अनुसार मेल सर्वर पर ईमेल को व्यवस्थित कर सकता है।
- इसकी मदद से बड़े आकार के इमेज, विडियो, फाइल या डॉक्यूमेंट को Attach करके भेजा जा सकता है।
IMAP PROTOCOL | DIS-ADVANTAGE OF IMAP
- IMAP को मेन्टेन करना जटिल है।
- इन्टरनेट कनेक्शन होने पर भी उपयोगकर्ता ईमेल को एक्सेस कर सकता है।
- IMAP प्रोटोकॉल POP3 की तुलना में धीमा है।
- IMAP प्रोटोकॉल सर्वर पर आने वाले पुरे खर्चे को बढ़ा देता है।
- IMAP में एक बार में पूरा ईमेल डाउनलोड नहीं होता है।
- X.400 protocol के निर्माण का उद्देश्य ई-मेल connectivity का permanent solution था।
- इसके विकास की आवश्यकता का कारण Single consistent addressing scheme बनाना था तथा Binary File Transfer जैसी समस्याओं का समाधान करना था।
- X.400 का कार्य 1980 में शुरू हुआ था ।
- X400 इस प्रकार का ई-मेल आदान-प्रदान करने के लिए एक मानक है जिसे ISO तथा CCITT जैसी मानक स्थापित करने वाली कम्पनियों का मान्यता प्राप्त है।
CONNECTIVITY PROTOCOL | INTERNET PROTOCOL
इसका पूरा नाम Internet protocol (इंटरनेट प्रोटोकॉल) होता है। यह कई नियमो का एक समूह (set) है जिसका प्रयोग इंटरनेट पर कम्युनिकेशन करने और डेटा ट्रांसफर की प्रक्रिया को कण्ट्रोल करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा इसका प्रयोग डेटा पैकेट को source से destination तक भेजने के लिए किया जाता है। इस प्रोटोकॉल को TCP/IP या UDP/IP के नाम से भी जाना जाता है जो connectionless (कनेक्शन रहित) सेवाएं प्रदान करता है। इंटरनेट प्रोटोकॉल का पहला वर्जन IPv4 था। इसके बाद 2006 में इसका दूसरा वर्जन बजार में आया जिसका नाम IPv6 था। यह एक लोकप्रिय प्रोटोकॉल है जिसका प्रयोग तेजी से किया जाने लगा।
INTERNET PROTOCOL | ADVANTAGE
- इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) का इस्तेमाल किसी व्यक्ति या organization के द्वारा किया जा सकता है।
- यह scalable होता है।
- यह विभिन्न प्रकार के कंप्यूटर में नेटवर्क को स्थापित करने में मदद करता है।
- यह बहुत सारें नेटवर्क रूटिंग प्रोटोकॉल को सपोर्ट करता है।
- यह स्वतंत्र (independent) रूप से काम करता है।
INTERNET PROTOCOL | DIS-ADVANTAGE
- यह एक complex प्रोटोकॉल है जिसे स्थापित करना कठिन होता है।
- इसे manage करना थोड़ा कठिन होता है।
- इस प्रोटोकॉल को बदलना आसान नहीं है।
- यह LAN जैसे छोटे नेटवर्क के लिए लोकप्रिय नहीं है।
CONNECTIVITY PROTOCOL| GOPHER
Gopher एक एप्लिकेशन-लेयर प्रोटोकॉल है जिसका प्रयोग वेब सर्वर पर स्टोर किये गये डाक्यूमेंट्स को एक्सेस करने लिए किया जाता है। इस प्रोटोकॉल के माध्यम से हम डाक्यूमेंट्स को देख भी सकते है। यह प्रोटोकॉल अलग अलग साइटों से डॉक्यूमेंट को खोजने, recovering करने और डिस्प्ले करने में मदद करता है।
GOPHER | ADVANTAGE
- यह एक सरल प्रोटोकॉल है।
- इसमें navigate करना आसान है।
GOPHER | DIS-ADVANTAGE
- इसमें एक ही स्क्रीन पर ग्राफिक्स और टेक्स्ट को मिक्स नहीं कर सकते।
- इस प्रोटोकॉल का उपयोग करने वाले यूजर HTML को नहीं देख सकते।
CONNECTIVITY PROTOCOL | UDP
UDP का पूरा नाम User Datagram Protocol (यूजर डाटाग्राम प्रोटोकॉल) होता है। यह एक transport layer कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल है जिसका उपयोग इंटरनेट पर कम्युनिकेशन के लिया किया जाता है।UDP में डेटा को ट्रांसफर करने से पहले कनेक्शन को स्थापित करने की आवश्यकता नहीं होती क्योकि यह एक connection-less प्रोटोकॉल है। इस प्रोटोकॉल का उपयोग ज्यादातर मनोरंजन जैसे (गेम खेलने , वीडियो देखने ) के लिए किया जाता है। यह इंटरनेट प्रोटोकॉल का एक हिस्सा होता है जो TCP की तुलना में कम विश्वसनीय (reliable) होता है।
UDP | ADVANTAGES
- इसमें डेटा को ट्रांसफर करने से पहले कनेक्शन को स्थापित करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
- यह मल्टीकास्टिंग के लिए suitable (उपयुक्त) होता है।
- यह तेज गति से कार्य करने वाला प्रोटोकॉल है।
UDP | DIS-ADVANTAGES
- यह TCP की तुलना में कम विश्वशनीय (reliable) होता है।
- यह error control का उपयोग नहीं कर सकता।
- इसमें त्रुटि (error) का पता लगाना मुश्किल होता है।
CONNECTIVITY PROTOCOL | ARP
- ARP का पूरा नाम Address Resolution Protocol है। यह एक communication protocol है जिसका प्रयोग IP Address के द्वारा डिवाइस के MAC address को खोजने के लिए किया जाता है। यह OSI Model के network layer का सबसे महत्वपूर्ण protocol है।
- ARP का मुख्य कार्य 32-bit IP address को 48-bit MAC address में बदलना है। इसका प्रयोग ज्यादातर device के MAC address को निर्धारित करने के लिए किया जाता है।
- इस protocol का प्रयोग तब किया जाता है जब कोई device दूसरी अन्य device से local area network या ethernet में communicate करना चाहती है।
- ARP एक network layer प्रोटोकॉल है। TCP/IP protocol suit में यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण protocol है।
- इसे 80 के दशक के शुरआती दिनों में ही develop (विकसित) कर लिया गया था लेकिन इसे 1982 में RFC 826 में define किया गया।
- ARP को IPv4, X.25, frame relay, ATM जैसी महत्वपूर्ण technologies (तकनीकों) के साथ implement किया गया है।
CONNECTIVITY PROTOCOL | DHCP
- DHCP का पूरा नाम Dynamic Host Configuration Protocol है। यह एक नेटवर्क मैनेजमेंट प्रोटोकॉल है जिसका प्रयोग एक नेटवर्क पर hosts को automatically आईपी एड्रेस assign करने के लिए किया जाता है। यह host को IP Address इसलिए assign करता है ताकि ये एक दूसरे से communicate कर सकें।
- DHCP को local networks के साथ-साथ बड़े networks पर भी implement (लागू) किया जा सकता है। DHCP एक default protocol है जिसका प्रयोग ज्यादातर सभी routers और दूसरे networking devices पर किया जाता है।
- DHCP को RFC (Request for Comments) 2131 भी कहते हैं।
- “किसी भी network में यदि कोई host किसी दूसरे host से communicate करना चाहता है तो इसके लिए उसके पास एक यूनिक IP address होना चाहिए।
- "बड़े network में हर host के पास manually जाकर IP addresses को assign नहीं कर सकते है। इस problem को solve करने के लिए DHCP का प्रयोग किया जाता है।"
- Dynamic Host Configuration Protocol का काम hosts को IP address assign करना होता है। ये IP address, आटोमेटिक assign किये जाते है।
- DHCP एक client/server protocol होता है। इसका port number 67 होता है।
- Hosts को IP address प्रदान करना DHCP का प्रमुख काम होता है। लेकिन यह IP address के अलावा बहुत सी information (सूचना) hosts को प्रदान करता है।
CONNECTIVITY PROTOCOL | SNMP
- SNMP का पूरा नाम Simple Network Management Protocol है। इसका प्रयोग नेटवर्क को मैनेज करने के लिए किया जाता है।
- यह एक इन्टरनेट स्टैण्डर्ड प्रोटोकॉल है जो कि IP नेटवर्क में डिवाइसों को मॉनिटर करता है, इन devices की जानकारी (डेटा) को एकत्रित तथा organize करता है।
- एसएनएमपी को ज्यादातर सभी नेटवर्क डिवाइस जैसे:- हब, स्विच, राऊटर, ब्रिज, सर्वर, मॉडेम, तथा प्रिंटर आदि के द्वारा सपोर्ट किया जाता है।
- SNMP जो है वह यूजर डाटाग्राम प्रोटोकॉल (UDP) का प्रयोग करता है। यह TCP/IP प्रोटोकॉल सूट का एक हिस्सा है परन्तु यह TCP/IP तक ही सिमीत नहीं है। SNMP को IETF (इन्टरनेट इंजीनियरिंग टास्क फ़ोर्स) ने डिफाइन किया था।
EMAIL PROTOCOL | S/MIME
- S/MIME इसका पूरा नाम secure/multipurpose internet mail extensions है। यह एक end-to-end encryption protocol है। जब हम कोई email भेजते है तो S/MIME हमारे email को encrypt कर देता है। इसे केवल receiver ही decrypt कर सकता है।
- S/MIME को email client के द्वारा implement किया जाता है परन्तु इसे digital certificate की जरूरत होती है। आजकल बहुत सारें modern email clients के द्वारा S/MIME को support किया जाता है।
CONNECTIVITY PROTOCOL | TELNET
- Telnet का पूरा नाम Telecommunication Network है। Telnet एक नेटवर्क प्रोटोकॉल है जिसका प्रयोग Internet या Local Area Network में remote computers को connect करने के लिए किया जाता है।
- Telnet को 1969 में विकसित किया गया था। इसे RFC 854 में define किया गया है। Telnet connections को virtual terminal connections कहा जाता है।
- Telnet (टेलनेट) किसी computer या host से connect करने के लिए TCP protocols का इस्तेमाल करता है। एक Host के port 23 पर Telnet service उपलब्ध रहती है।
- टेलनेट के माध्यम से हम किसी host या computer के पास physically जाए बिना भी उससे information को access कर सकते है या programs को run करवा सकते है। इससे हमारा time भी बचता है और effort भी कम लगता है।
- किसी computer को telnet करते समय हम उसके username और password को use करते है। एक बार उस computer में login होने के बाद हम उसे किसी local user की तरह access कर पाते है।
TELNET | ADVANTAGE
- इसके द्वारा हम data को send तथा receive कर सकते है।
- यह user authentication को सपोर्ट करता है।
- सभी telnet clients और servers एक network virtual terminal (NVT) को implement करते हैं।
- इसका इस्तेमाल बहुत सारें operating systems में किया जा सकता है।
- इससे हमारा बहुत सारा समय बच जाता है. क्योंकि हमें physically किसी host के पास नहीं जाना पड़ता।
- यह बहुत ही flexible है क्योंकि इसे किसी भी computer में deploy किया जा सकता है।
- इसमें username और password को बिना किसी encryption के transmit किया जाता है. जो कि एक बहुत बड़ा security risk है। इससे hackers हमारे computer को hack कर सकते हैं और information को चुरा सकते है।
- Telnet में GUI पर आधारित tools को run नहीं करवा सकते क्योंकि यह character पर आधारित communication protocol है।
- यह बहुत inefficient (अप्रभावी) protocol है।
- इसमें typing speed बहुत slow होती है।
CONNECTIVITY PROTOCOL | FTP
- FTP का पूरा नाम (File Transfer Protocol) है। यह एक एप्लीकेशन लेयर प्रोटोकॉल है जिसका उपयोग फाइलों को एक सिस्टम से दुसरे सिस्टम में transfer करने के लिए किया जाता है।
- इसके अलावा यह सिस्टम में web page फाइलों को ट्रांसफर करने में मदद करता है।
- FTP को TCP/IP के द्वारा develop किया गया है। इसे नियमो (rule) का समूह (set) भी कहा जाता है जो सिस्टम में फाइलों को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को control करता है।
- इसका उपयोग करके यूजर सर्वर से फाइलों को download कर सकता है।
- यह फाइलों को एक transfer करते वक़्त तीन अलग अलग mode का उपयोग करता है, Block, stream और compressed.
FTP | ADVANTAGE
- यह फाइलों को तेज गति के साथ ट्रांसफर करता है जिसकी वजह से यूजर के समय की बचत हो जाती है।
- यह काफी सुरक्षित होता है क्योकि FTP server में यूजर को एक्सेस प्राप्त करने के लिए user Id और password की ज़रूरत पड़ती है।
- इसका उपयोग करना किसी भी यूजर के लिए आसान होता है।
- यह HTTP की तुलना में काफी तेज होता है।
- यह बड़ी आकार वाली फाइलों को ट्रांसफर करने में सक्ष्म होता है।
- इसका प्रयोग करके यूजर अलग अलग फाइलों को एक साथ ट्रांसफर कर सकता है।
- यह सभी प्रकार के operating system को सपोर्ट करता है।
- यह सभी प्रकार के host को सपोर्ट करता है।
FTP | DIS-ADVANTAGE
- फाइलों को ट्रांसफर करते वक़्त FTP encryption की सुविधा प्रदान नहीं करता जिसकी वजह से hackers फाइलों को आसानी से चोरी कर सकते है और यूजर के डेटा का उपयोग गलत कामो के लिए कर सकते है।
- FTP में limited user मोबाइल डिवाइस को एक्सेस कर सकते है।
- यह सभी सिस्टम के लिए compatible नहीं है जिसका अर्थ यह है की FTP सभी प्रकार के सिस्टम को सपोर्ट नहीं करता।
- इसमें error को detect करना काफी मुश्किल होता है।
- इसमें वायरस को scan करना मुश्किल होता है।
- FTP में कनेक्शन को filter करना काफी मुश्किल होता है।
- इसमें remote system में उपलोड की गई फाइलों को track करना मुश्किल होता है।
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