O LEVEL | M1-R5 | Networking Components BY. SUNRISE COMPUTER
NETWORKING COMPONENT
NETWORKING COMPONENT | INTERNET SERVICE PROVIDER
इसका work प्रत्येक नेटवर्क को इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर करने का होता है। ISP की सबसे updated technology 5G है। प्राय: इसकी शुरुआत 1981 में US द्वारा की गई थी। ISP की पहली टेक्नोलॉजी 1G थी।
NOTES:-
- 1G network analog signal पर आधारित था। जिसकी maximum speed 2.4kbps थी। इसे 1981 में USA द्वारा डिवेलप किया गया था।
- 2G network की शुरुआत Finland में 1991 मैं हुई थी। इस network में download तथा upload की maximum speed 64kbps थी।
- 2G का update version 2.5G network था। जिसकी स्पीड enhance करके 144kbps होती है।
- 3G network की शुरुआत सन् 2000 में की गई थी। इस नेटवर्क की स्पीड 400kbps - 2mbps तक थी। इस नेटवर्क के द्वारा video calling, online gaming, web TV, etc. का use किया जाने लगा।
- 4G network को सन् 2007 में test किया गया था। उसका नाम Wi-MAX रखा गया था। सन् 2008 में 4G नेटवर्क को पुनः long term evolution के साथ लॉन्च किया गया। इसकी मैक्सिमम स्पीड 1gbps होती है।
- 5G network को अभी तक का सबसे modern नेटवर्क माना जाता है। जो कि पूर्ण रूप से wireless communication को support करता है। भारत में इसकी स्पीड maximum 10Gbps तक होती है।
- Present time में Jio, Airtel, BSNL, VI, ISP के प्रमुख example हैं।
- सर्वप्रथम ISP की शुरुआत VSNL द्वारा की गई।
NETWORKING COMPONENT | DOMAIN NAME SYSTEM
इसका यूज़ इंटरनेट की किसी specific website को उसके IP address से search करने के लिए responsible होता है। इंटरनेट पर प्रत्येक uploaded data का अपना domain name होता है जिसे URL के नाम से जाना जाता है। इसका main work string character को directly IP में convert करने का होता है।
NETWORKING COMPONENT | HTTPS
यह प्रोटोकॉल हमें बताता है कि login की गई वेबसाइट secure है या नहीं। यह प्रोटोकॉल port no. 80 पर work करता है।
NETWORKING COMPONENT | BANDWIDTH
नेटवर्क में transmit हो रहे डाटा पैकेट की speed की unit को bandwidth कहते हैं।
NETWORKING COMPONENT | ROUTER
- Router एक networking device होता है जिसका use network में transmit हो रहे डाटा पैकेट को route define करने के लिए किया जाता है।
- Router के पास स्वयं की अपनी memory होती है। जिसमें client व node PC द्वारा की गई request को IP के form में record करता है। जिसके लिए RIT responsible होता है।
- Router सबसे पहले डाटा packet को analyze करता है तथा जब रिक्वेस्ट का सही रिजल्ट प्राप्त हो जाता है तो उसको result को requested IP को send कर देता है ।
- Router में प्रत्येक task के लिए अलग-अलग protocol work करते हैं।
- Router की प्रमुख company Cisco व D-Link है।
- Router अन्य networking device की तुलना में काफी costly होता है।
ROUTER | FEATURE
- यह OSI model की तीसरी layer पर कार्य करता है।
- यह data को IP address के based पर filter करता है।
- यह एक networking device होने के साथ-साथ एक hardware device(जो अन्य repeater,bridge, gateway) etc. के features को अपने अंदर रखता है।
- Router के प्रमुख component CPU, flash memory, RAM, Console, network तथा interface card होता है। हि
- यह user को LAN व WAN की connectivity provide करता है।
ROUTER | TYPES
Router मुख्यता 2 प्रकार के होते है -
- Wireless router
- इसका use mobile, tablet, computer, laptop में internet provide करने के लिए करते है।
- इस connectivity में किसी wire का use नही होता है।
- Wireless router की range 100 feet - 300 feet तक होती है।
- Secure wireless device के लिए router काफी अच्छे माने जाते है।
- Broadband router
- यह router ISP द्वारा user को provide किए जाते है।
- इसमें data high speed से transfer होता है, comperssion to wireless router।
- Broadband router का use करके online gaming, video calling etc. के लिए VOIP work करता है।
- इस router को dsl के नाम से भी जाना जाता है।
ROUTER | ADVANTAGE
- Security :- सुरक्षा के मामले में router काफी अच्छे डिवाइस होते है। यह यूजर के डेटा को सुरक्षा प्रदान करता है जिससे यूजर का डेटा पूरी तरह secure (सुरक्षित) रहता है। इसके अलावा Router में यूजर को लॉगिन करने के लिए user ID और password की ज़रूरत पड़ती है जो इसे और भी ज्यादा secure बना देता है।
- Dynamic routine :- राऊटर में Dynamic routing का इस्तेमाल किया जाता है जिससे राऊटर यह पता लगाता है कि डाटा को ट्रांसफर करने के लिए सबसे best path (रास्ता) कौन-सा है। इसके कारण नेटवर्क में होने वाला traffic काफी हद तक कम हो जाता है।
- Reliability :- Router बहुत ही reliable (विश्वनीय) है अगर किसी वजह राऊटर का सर्वर डाउन हो जाता है या फिर केबल में कोई खराबी आ जाती है। तो router और दूसरे नेटवर्क में इसका कोई भी बुरा प्रभाव नही पड़ता।
- Connection oriented :- Connection राऊटर का मुख्य कार्य होता है जिसकी मदद से यूजर इंटरनेट कनेक्टिविटी प्राप्त करता है। जिसके कारण यूजर आसानी से डेटा को एक डिवाइस से दुसरे डिवाइस में ट्रांसफर कर सकता है। राऊटर बहुत सारीं डिवाइसों को एक single नेटवर्क के साथ connect करता है। जिससे productivity (उत्पादकता) बढ़ती है।
- Packet filtering :- राऊटर packet filtering और packet switching की सुविधा प्रदान करता है। इसकी मदद से यह डेटा पैकेट्स को filter करता है। अगर कोई डेटा पैकेट खराब होता है तो उसे आगे ट्रांसफर करता है।
- Integration :- Routers को modem के साथ integrate किया जा सकता है। इन दोनों के integration से छोटे नेटवर्क को create किया जा सकता है।
ROUTER | DIS-ADVANTAGE
- Speed :- Router डेटा को पूरी तरह analyse करता है जिसके कारण डेटा analyse करने में router को काफी समय का वक़्त लग जाता है। जिससे इसकी गति काफी धीमी हो जाती है, और इंटरनेट कनेक्शन भी धीमा हो जाता है।
- Bandwidth shortage :- Communication करने के लिए राऊटर डायनेमिक रूटिंग तकनीकों (Dynamic Routing Techniques) का उपयोग करता है जिसके कारण नेटवर्किंग में overheads की समस्या उतपन्न होती है।
- Cost :- किसी अन्य networking devices की तुलना में routers काफी ज्यादा expensive (महंगे) होते है क्योकि इसमें सिक्योरिटी और ब्रिज जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती है जो इस डिवाइस को और भी ज्यादा expensive बनाती है, जिसके कारण router को setup करने में काफी पैसो का खर्चा आता है।
- Implementation :- इसको इम्पलीमेंट करने के लिए बहुत सारे configurations और NAT की ज़रूरत पड़ती है, NAT और configurations के बिना राऊटर को set up करना काफी मुश्किल होता है।
NETWORKING COMPONENT | SWITCH
- यह एक networking device होता है।जिसका use network को multiple segments में divide करने के लिए किया जाता है।
- Switch market में multiple port के साथ आते है,जिसमे n-1 connection stablish किए जा सकते है।
- Switch OSI model की दूसरी layer पर work करता था, परंतु latest switch device OSI की तीसरी layer पर work करता है।
- Switch एक intelligent device होता है जो की प्रत्येक client computer की information को store रखता है।
- Switch में network traffic collision नही होता है। यदि किसी कारण network में traffic collision होता है तो switch collisioned computer को reconfigure कर देता है।
- Switch में inbuilt hardware chip पाई जाती है, जिनका कार्य switching का होता है तथा speed के लिए responsible होती है।
SWITCH | ADVANTAGE
- यह network की bandwidth को बढ़ा देता है ।
- यह host के workload को काफी हद तक कम कर देता है।
- Switch network की performance को बढ़ा देता है।
- जिन नेटवर्क में switch का use किया जाता है उसमें frame collision कम हो जाता है।
- Switch का use workstation के साथ-साथ direct भी किया जाता है।
SWITCH | DIS-ADVANTAGE
- यह hub और bridge से बहुत costly आता है।
- इसमें network की error को find करना बहुत मुश्किल होता है।
- Switch में security अन्य networking device की तुलना में अधिक होती है।
SWITCH | TYPES
- Manage switch :- Manage switches में high security के साथ-साथ full network management features पाए जाते हैं । इसके माध्यम से नेटवर्क को extend किया जा सकता है।
- Unmanaged switch :- इस प्रकार के switches का use घरों में तथा बिजनेस में किया जाता है।यह switch plug and play mode पर कार्य करते हैं। यह switches अन्य switches की तुलना में सस्ते आते हैं।
SWITCH | FEATURES
- यह OSI model की data link layer व network layer पर work करता है।
- यह डाटा पैकेट को client PC तक (destination)तक send करने के लिए mac-address का use करता है ।
- यह unicast, multicast , broadcast communication को सपोर्ट करता है।
NETWORKING COMPONENT | HUB
Hub एक नेटवर्किंग डिवाइस होता है जिसको यूज़ नेटवर्क में कंप्यूटर को ऐड कराने के लिए किया जाता है।Hub एक Illittrate device होता है जिसके पास स्वयं की बुद्धि नहीं होती है । यह नेटवर्क डिवाइस present time में प्रचलन से बाहर है।
HUB | TYPES
- ACTIVE HUB :- Active hub ऐसा नेटवर्किंग डिवाइस होता है जो कि connector के रूप में कार्य करता है परंतु सिग्नल को regenerate नहीं कर पाता है।
- PASSIVE HUB :- इस प्रकार के hub का use multi-port तथा signal regeneration के लिए किया जाता है।
NETWORKING COMPONENT | REPEATER
Repeater एक नेटवर्किंग डिवाइस होता है जिसका use नेटवर्क में digital signal की bandwidth को regenerate करने के लिए किया जाता है। Present time में latest routerमें repeater inbuilt होता है।
NETWORKING COMPONENT | MODEM
Modem का पूरा नाम modulator और demodulator होता है। इसका प्रयोग एनालॉग सिगनल को डिजिटल तथा डिजिटल सिगनल को एनालॉग में convert करने के लिए किया जाता है । Modem की speed को Bps और kbps में मापा जाता था।
NETWORKING COMPONENT | NETWORK INTERFACE CARD
NIC एक hardware component होता है जो कि कंप्यूटर में लगाने के बाद user इंटरनेट का यूज कर सकते हैं । इसको ethernet card ,LAN adopter, broadband adopter भी बोलते हैं । NIC को directly motherboard में install किया जाता है। NIC इंटरनेट के सभी protocol को support करता है।
NETWORK INTERFACE CARD | TYPES
- INTERNAL NETWORK CARD :- प्रत्येक कंप्यूटर में पहले से एक NIC port दिया गया होता है । जिसमें ethernet cable के माध्यम से इंटरनेट connectivity provide की जाती है ।इसमें RJ45 की ethernet cable work करती है।
- EXTERNAL NETWORK CARD :- जब इंटरनेट नेटवर्क कार्ड को मदरबोर्ड support नहीं करते हैं तो external network card का use करते हैं ।जो कि मार्केट में wifi dongle, wireless usb device के form में उपलब्ध है।
NETWORKING COMPONENT | BRIDGE
यह एक नेटवर्किंग डिवाइस होता है जो किन्ही दो अलग-अलग नेटवर्क को आपस में जोड़ने के लिए उसे किया जाता है यह OSI की second layer पर work करता है. Bridge में data अथवा information को डाटा पैकेट के रूप में transmit ना करके segment में transmit करते हैं इसमें केवल 2 port पाए जाते हैं -a) in b)out
NETWORKING COMPONENT | GATEWAY
Gateway एक networking device होता है। जिसका use telecommunication के लिए किया जाता है। यह TCP/IP वा OSI कि किसी भी layer पर कार्य करने में सक्षम होता है । Gateway में डाटा ट्रांसफर करने के लिए packet switching technic का use किया जाता है। यह डिवाइस network connector के रूप में कार्य करता है। Gateway का प्रयोग दो अलग-अलग network को आपस में जोड़ने के लिए किया जाता है।
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